IndiGo की हाल की उड़ान अव्यवस्था से उबरने के बाद कंपनी ने फिर से नेटवर्क स्थिर कर लिया है और CEO Pieter Elbers के मुताबिक अब ऑपरेशंस सामान्य स्तर पर लौट आए हैं। InterGlobe Aviation के तहत चलने वाली कंपनी ने ताज़ा तिमाही में नुकसान के बावजूद राजस्व और ऑपरेशनल प्रॉफिट में सुधार दिखाया है, जबकि शेयरहोल्डिंग पैटर्न में भी बदलाव नजर आ रहा है।
संचालन में तेज रिकवरी
हाल के दिनों में IndiGo को क्रू की कमी और परिचालन चुनौतियों के कारण बड़ी संख्या में उड़ान रद्द और देरी का सामना करना पड़ा, जिससे यात्रियों को काफी दिक्कत हुई। CEO Pieter Elbers ने वीडियो संदेश में कहा कि अब एयरलाइन रोज़ 1,800 से ज्यादा उड़ानें संचालित कर रही है और ऑन-टाइम परफॉर्मेंस फिर से सामान्य स्तर पर पहुंच गई है। उनका कहना है कि कंपनी सिस्टम की मजबूती, जांच प्रक्रिया और भविष्य में ऐसी दिक्कत दोबारा न हो, इस पर खास ध्यान दे रही है, जिससे ब्रांड पर भरोसा बनाए रखने में मदद मिलेगी।
बिजनेस मॉडल और इंडस्ट्री पर असर
IndiGo का बिजनेस मॉडल लो-कॉस्ट कैरियर पर आधारित है, जिसमें उच्च सीट लोड फैक्टर, तंग कॉस्ट कंट्रोल और तेज फ्लाइट टर्नअराउंड कंपनी की मुख्य ताकत मानी जाती है। घरेलू एविएशन बाजार में सबसे बड़ी हिस्सेदारी होने के कारण किसी भी ऑपरेशनल बाधा का सीधा असर पूरे सेक्टर की कनेक्टिविटी और किराया रुझान पर पड़ता है। हाल की अव्यवस्था के बाद भी कंपनी ने नेटवर्क बहाली को “war footing” पर पूरा कर लिया, जिससे यह संकेत मिलता है कि स्केल और सिस्टम दोनों स्तर पर इंडस्ट्री में इसकी पकड़ मजबूत बनी हुई है।
हालिया Q2 नतीजे (Q2 FY26)
InterGlobe Aviation ने सितंबर 2025 में समाप्त तिमाही (Q2 FY26) में रुपये की कमजोरी और डॉलर डिनॉमिनेटेड लीज लाइबिलिटी की रीवैल्यूएशन के कारण बड़ा नेट लॉस रिपोर्ट किया, हालांकि कोर ऑपरेशन मजबूत रहे। कंपनी ने कुल राजस्व, ऑपरेशनल मार्जिन और यात्रियों की संख्या में साल दर साल वृद्धि दर्ज की, जबकि EBITDAR में तेज सुधार देखने को मिला
| Metric (Q2 FY26) | Value |
|---|---|
| Total revenue | ₹19,599 crore |
| Revenue from operations | ₹18,555 crore |
| Net loss | ₹2,582 crore |
| Profit excluding forex impact | ₹104 crore |
| EBITDAR (ex-forex) | ₹3,800 crore |
| Passengers carried | 28.8 million |
शेयर होल्डिंग पैटर्न और स्टॉक प्रासंगिकता
InterGlobe Aviation में प्रमोटर हिस्सेदारी धीरे-धीरे घटकर हालिया तिमाहियों में करीब 41.58 प्रतिशत पर आ गई है, जबकि FII और DII की हिस्सेदारी मजबूत स्तर पर बनी हुई है। इससे संकेत मिलता है कि संस्थागत निवेशक कंपनी के दीर्घकालिक ग्रोथ प्रॉस्पेक्ट्स पर भरोसा बनाए हुए हैं, भले ही हालिया तिमाहियों में फॉरेक्स से जुड़ा दबाव रहा हो।
| Category | Shareholding (latest) |
|---|---|
| Promoters | 41.58% |
| Foreign institutional investors | 28.44% |
| Domestic institutional investors | 24.66% |
| Retail and other investors | 5.32% |
स्टॉक के लिए क्या मायने
ऑपरेशनल स्तर पर IndiGo की तेज रिकवरी, मज़बूत नेटवर्क और उच्च कैश बैलेंस जैसे कारक लंबी अवधि में कंपनी को बेहतर स्थिति में रखते हैं, हालांकि फ्यूल कॉस्ट और करेंसी वोलैटिलिटी जैसी चुनौतियां बनी रहेंगी। Q2 FY26 में रिपोर्ट हुआ बड़ा नेट लॉस मुख्य रूप से फॉरेक्स इम्पैक्ट के कारण रहा, जबकि कोर बिजनेस ने ऑपरेशनल प्रॉफिट और ऊंचा EBITDAR दिखाकर स्ट्रक्चरल स्ट्रेंथ को दोहराया है। शेयरहोल्डिंग डेटा यह भी दर्शाता है कि स्टॉक में संस्थागत भागीदारी गहरी है, जो वॉल्यूम और लिक्विडिटी दोनों के लिए अहम है।
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